एक खामोश बातचीत
(आप भी सुनेंगे.....)
लब हिले तक नहीं,
हमने तुम्हे छुआ तक नहीं
केवल नयन ने झाँका था,
क्या ये प्यार था ....
छन भर की मुलाकात,
न हुई कोई बात ...
न तुम मुझे जानती थी ,
न मैं तुम्हे जानता था ,
एक खामोश बातचीत हुई थी ,
क्या ये प्यार था ....
Thursday, 4 November 2010
Tuesday, 19 May 2009
खजुराहो की याद में..........
ऐ मेरे तस्ब्वुर की नूर
मेरे हिस्सास-ऐ-कुलूब में कुछ इस कदर हो
घटा सावन को चिढाती जुल्फें !
उन्नत पेशानी !
चश्में गजाल !
काम के मान भवें !
करनी से सजी पलकें !
मशरिकी उफक का सहर !
के अफताब सा रुखसार !
गुलाबी अधर !
और ऐ स्निघ्ध तवस्सुम !
अमल धवल तुहिन कण सा
दंत क़तर !
तव्रील सी गर्दन !
तुंग तुंग सुमेरु सा उरोज !
प्रणय कलह करती घानी चूनर !
जून की तप्त सेहरा सा उदर !
शांत सागर की भंवर सी नाभि !
जैसे की हो पान पत्र द्राक्षासव का
उतुंग पहाडी सड़क की भांति
पतली बलखाती कमर !
अवशिस्ट पठार जैसी नितम्ब !
मदन को ताउद करता
रजत रचित सरापा !
ओ गम्ज ओ अदा !
पहरी अवरोधों को पार कर
मैदान में उतरने की
खुशी इजहार करती
इतराती, इठलाती, बलखाती
नदियों सी चाल !
तेरे बदन से मंद मंद निकलती
उन्मादक परिमल !
कैसे न देखे कोई तुझे मदिरारुग्न आंखों से
शूअराओं की परवाज हो !
मुस्निफ्फों की कबीले तहरीर हो तुम !
कोणार्क की काम !
अजंता वातसल्य की मूर्ति तुम !
कला की स्राष्ठआ हो तुम !
खजुराहो की प्रतिष्ठा हो तुम !
फनकारों की फेन हो तुम !
रागों रागों की राग हो तुम !
सूरों की तन हो तुम !
ऋतुओं की वसंत हो तुम !
आशिकों की अरमाँ हो तुम !
सुन्दरता की देवी डायना
की प्रतिमा हो तुम !
गख्रें आफ़ताब की ऐना हो तुम !
तुम्हारे एजाज में चाँदनी होती कम
हे कल्पनाओं की देवी, तुम्हारे रुप
के वर्णन में लुगत भी पर जाते है कम
ऐ मेरे ख्वाब की मानुस
जिस आकिद से
मैंने तुम्हारी तसनीक की
ताकि
तरीके जिंदगी में सुकून दे सके !
*****
Tuesday, 3 June 2008
यादें......
यादें......
तेज धूप में चलते हुए...
अचानक तुम्हारे आँचल के छाँव का एहसास हुआ
तुम याद आए
बारिश की बूँदें जब पलकों से अधरों पर गिरी
तुम याद आए
Tuesday, 12 February 2008
मेरा बचपन
यादों की पुरवाई चली
एक झोंका बचपन का आया
भूली बिसरी नटखट बातें
एक पल में समेट लाया.
भरी दोपहरी,
छुप-छुपाके, माँ से
गाछी में भाग जाना
चड़ना पेड़ों पर निडर
तोड़ना जामुन, आम, इमली
डालिओं पर खेलना दोल-पात
लड़ना संगियों के साथ
स्कूल छोड़कर भाग जाना और
हल्कू काका के खेत से
चुराकर चूसना गन्ना,
तोड़ना मकई की बाली
और जुम्मन मियां की शिकायत,
उलटी सीधी हरकते
इक पल में समेट लाया,
केले का तना, बांस का डंडा, मिटटी का घड़ा
और उनसे बनाना नाव
डुबकियां लगाना तालाब में
और तोड़ना कमल के फूल
गिल्ली डंडा, बुढ़िया कबड्डी,
मेरी बॉलिंग, बीरू की बैटिंग,
बारिश में लगाना दौड़,
दोस्तों के साथ
कीचड में सना शरीर, और
पकड़ना मेड़ों पर मछलियाँ,
भूली बिसरी नटखट बातें
इक पल में समेट लाया।
MERA BACHPAN
Yadon ki purvai chali
Ek jhonka bachpan ka ayya
Bhooli bisree natkhat batein
Ek pal mein samet laya.
Bhari dopahari,
Chhup-chhupake, maa se
Gaachhi mein bhag jaana
Chadna peron par nidar
Todna jamun, aam, imli
Dalion par khelna dol-pat
ladna sangion ke saath
School chhorkar bhag jaana aur
Halku kaka ke khet se
Churakar choosna ganna,
Todna Makai ki baali
Aur jumman miyan ki sikayat,
Ulti seedhi harktey
Ek pal mein samet laya,
Kele ka tana, bans ka danda, mitti ka ghara
Aur unse banana nao
Dubkiyan lagana talab mein
Aur todna kamal ke phool
Gilli danda, budhiya kabaddi,
Meri bowling, beeru ki batting,
Barish mein lagana daud,
Doston ke saath
Keechad mein sana sharer, aur
Pakadna medon par machliyan,
Bhooli bisree natkhat batein
Ek pal mein samet laya.
एक झोंका बचपन का आया
भूली बिसरी नटखट बातें
एक पल में समेट लाया.
भरी दोपहरी,
छुप-छुपाके, माँ से
गाछी में भाग जाना
चड़ना पेड़ों पर निडर
तोड़ना जामुन, आम, इमली
डालिओं पर खेलना दोल-पात
लड़ना संगियों के साथ
स्कूल छोड़कर भाग जाना और
हल्कू काका के खेत से
चुराकर चूसना गन्ना,
तोड़ना मकई की बाली
और जुम्मन मियां की शिकायत,
उलटी सीधी हरकते
इक पल में समेट लाया,
केले का तना, बांस का डंडा, मिटटी का घड़ा
और उनसे बनाना नाव
डुबकियां लगाना तालाब में
और तोड़ना कमल के फूल
गिल्ली डंडा, बुढ़िया कबड्डी,
मेरी बॉलिंग, बीरू की बैटिंग,
बारिश में लगाना दौड़,
दोस्तों के साथ
कीचड में सना शरीर, और
पकड़ना मेड़ों पर मछलियाँ,
भूली बिसरी नटखट बातें
इक पल में समेट लाया।
MERA BACHPAN
Yadon ki purvai chali
Ek jhonka bachpan ka ayya
Bhooli bisree natkhat batein
Ek pal mein samet laya.
Bhari dopahari,
Chhup-chhupake, maa se
Gaachhi mein bhag jaana
Chadna peron par nidar
Todna jamun, aam, imli
Dalion par khelna dol-pat
ladna sangion ke saath
School chhorkar bhag jaana aur
Halku kaka ke khet se
Churakar choosna ganna,
Todna Makai ki baali
Aur jumman miyan ki sikayat,
Ulti seedhi harktey
Ek pal mein samet laya,
Kele ka tana, bans ka danda, mitti ka ghara
Aur unse banana nao
Dubkiyan lagana talab mein
Aur todna kamal ke phool
Gilli danda, budhiya kabaddi,
Meri bowling, beeru ki batting,
Barish mein lagana daud,
Doston ke saath
Keechad mein sana sharer, aur
Pakadna medon par machliyan,
Bhooli bisree natkhat batein
Ek pal mein samet laya.
Thursday, 17 January 2008
तन्हाई से मुलाक़ात
कल शाम तन्हाई मिला था मुझे
नुक्कर के पास,
बचने की बहुत कोशिश की
उसने देख ही लिया
हाल-चाल पूछा मेरा
मैंने कहा
जब से साथ है छूता है तुम्हारा
बहुत याद आते हो
कितने खुश थे हम, जब तुम मेरे साथ थे
केवल मैं था और तुम they
पार्क के पत्थर पर बैठे
दोपहरी में
देखा करते थे शून्य आकाश में ।
दूर निकल जाया करते थे
उस सूनी सड़क पर
अचानक,
सामने से आती गाड़ी की सीटी की आवाज़ से
चौंक जाया करते थे
नुक्कर के पास,
बचने की बहुत कोशिश की
उसने देख ही लिया
हाल-चाल पूछा मेरा
मैंने कहा
जब से साथ है छूता है तुम्हारा
बहुत याद आते हो
कितने खुश थे हम, जब तुम मेरे साथ थे
केवल मैं था और तुम they
पार्क के पत्थर पर बैठे
दोपहरी में
देखा करते थे शून्य आकाश में ।
दूर निकल जाया करते थे
उस सूनी सड़क पर
अचानक,
सामने से आती गाड़ी की सीटी की आवाज़ से
चौंक जाया करते थे
Wednesday, 2 January 2008
जमुना किनारे कान्हा बजेयेगा अपनी मुरलिया....
धून मुरली सुन, बज उठेगी पायलिया...
पायलिया की रुनझुन, मुरली की तान...
राधा तो है, किशन की जान.......
धून मुरली सुन, बज उठेगी पायलिया...
पायलिया की रुनझुन, मुरली की तान...
राधा तो है, किशन की जान.......
Thursday, 22 November 2007
रास्ते का दूब
मैं रास्ते का दूब।
चांदनी में पनपा मैं
ओस ने सींचा मुझे
निशा ने मुझे गोद में खिलाया
टिटहरी ने संगीत सुनाया
भोर की किरणों से चमक मिली
मंद मंद समीर ने सहलाया।
नयति मेरी ....
सुबह पथिक के रास्ते को
मखमली बनाता मैं
पर हर रोज कुचला जाता मैं
मैं रास्ते का दूब
चांदनी में पनपा मैं
ओस ने सींचा मुझे
निशा ने मुझे गोद में खिलाया
टिटहरी ने संगीत सुनाया
भोर की किरणों से चमक मिली
मंद मंद समीर ने सहलाया।
नयति मेरी ....
सुबह पथिक के रास्ते को
मखमली बनाता मैं
पर हर रोज कुचला जाता मैं
मैं रास्ते का दूब
